गांधी के बेटे ही गांधी के हत्यारे हैं॥ जागो जागो जागो तुम्हें जगाने आया हुँ॥ जीना है तो पापियों का खून पीना सीख॥ वन्दे मातरम् । फिर मत कहना कवियों ने

जागो जागो जागो जागो
तुम्हें जगाने आया हुँ॥

सत्ता ने आजादी की मनवाई स्वर्णिम जुबली है।
बूटों से रुंद गया तिरंगा रंगी खून से हुबली है॥
बम विस्फोटों से घायल बम्बई दिल्ली और पटना है।
रोज एक से बड़ी एक होती जाती दुर्घटना है॥
क्या खोया है क्या पाया इस अर्धशती के सालों में।
भारत के सैनिक कैदी है, पाक जैल के तालों में॥
कर्फ्यू है घर से बाहर ना आओ यही मुनादी है।
वीर शहीदों के सपनों की क्या ये ही आजादी है॥
घुटती सांसे दबती चीखें देती सिर्फ सुनाई हैं।
आतंकों के भय से देश में मरघट सी तन्हाई है॥
खून से लतपथ भारत भर के गांव नगर और गलियॉं है।
समझौतों की मेजों पर ए.के.छप्पन की नलियॉ है॥
संविधान का खून किया है संसद की दीवारों ने।
भारत मॉं की बलि चढ़ा दी देखो खुद सरकारों ने॥
नेताजी के जीवन का कुछ पता नहीं चल पाया है।
लाल बहादूर की मृत्यु का भेद नहीं खुल पाया है॥
श्यामा जी को मार दिया है विष देकर के जेलों में।
दीन दयालों की लाशें हैं आजादी की रेलों में॥
आजादों की मां भूखी है बहिन त्रस्त है बिस्मिल की।
यही दशा है देश भक्ति के बलिदानों की मंजिल की॥
लाल बहादुर की लाशों पर शिमला से समझौते हैं।
परिणामों में इन्दिरा और राजीव गांधी की मौते हैं॥
देश द्रोह की शिक्षा हेतु मैकाले स्कूल खुले।
ऐसे चक्कर में सरदार पटेलों को हम भूल चले॥
इन अंगारों पर छाई राख उड़ाने आया हुँ॥
आजादी फिर खो ना जाये ये चेताने आया हुँ॥
जागो जागो जागो जागो तुम्हें जगाने आया हुँ॥
भूखे पेटों का उपहास उडा़ता महंगा राशन है।
सस्ते केवल रंग रंगीले सत्तावाले भाषण है॥
खाने को है नहीं शुगर पर मिलती ब्राउन शूगर है।
पच्चीस पैसे बना रुपैया धनदोहन जादूगार है।
ताला मिल के द्वारों में है महंगाई बाजारों में।
समृध्दि भारत की केवल नेताओं के नारों में।
भ्रष्टाचार को कानूनी संरक्षण है।
संसद में रामा स्वामी का रक्षण है॥
सरकारी उद्यम सारे ही लूट लिये रखवालों ने।
सोना गिरवी पड़ा हुआ है वर्ल्ड बैंक के तालों ने।
देश की समृध्दि जेबों में है हर्षद मेहताओं की।
सूटकेस में नैतिकतायें कैद हुई नेताओं की।
चुरहट,पनडुब्बी,एयर बस और बौफोर्स के किस्से है।
प्रतिभूति और शेयर में तो राव तलक के हिस्से हैं।
गेहूँ चीनी रेल सभी पर बेईमानी का साया है।
जांच रिपोटरों की लपेट में मंत्री मंडल आया है।
भ्रष्टाचार और भारी कर्जा ये बतलाने आया हुँ॥
जागो जागो जागो जागो तुम्हें जगाने आया हुँ॥
रुप बदल कर सत्ता में फिर से जा बैठे गजनी हैं।
इंका शासन की खंजर मुगलों से ज्यादा वजनी हैं॥
आतंकी और सत्ता दोनों देश भक्त की बैरी है।
एवरेस्ट से उंची भक्तों की लाशों की ढेरी हैं॥
हत्यारे बम बन्दुक और नूतन हथियार से सज्जित हैं।
देश भक्ति दिखलाने से ही सी.बी.आई लज्जित है॥
झूम रहे हैं नाग़ विदेशी तुष्टीकरण की रागों से।
देश की भक्ति प्रतिबंधित है छल छद्मों के धागों से॥
सत्ता को तो कैद मिली है सुरा-सुन्दरी बाहों की।
और गद्दारों पर छाया है मस्जिद और दर्गाहों की॥
पेट्रो डालर से ये सेक्यूलर फिल्में प्रयोजित है।
देश की हत्या का उत्सव दाउद द्वारा आयोजित है।
इन खूनी फिल्मों का ट्रेलर तुम्हें दिखाने आया हुँ॥
जागो जागो जागो जागो तुम्हें जगाने आया हुँ॥
भारत की जय कहने से कश्मीरी पंडित दंडित हैं।
सत्ता द्वारा आतंकी और खूनी महिमा मंडित हैं॥
केसर की क्यारी ने उगती बम बन्दूकों की फसलें।
तुष्टीकरण ने पैदा की हैं भारत में ऐसी नस्लें॥
सत्ता की शह पर भारत में घुसपैठी घुस आये हैं।
आर.डी.एक्स के लोगों ने घर घर में ढेर लगाये हैं॥
जहर बना डल-झेलम राबी और चिनाब का पानी है।
सिगरेटों से इस भारत की झुलसी गई जवानी है॥
आतंकी को सरकारी मेहमान बनाया जाता है।
और टी.वी. पर यासीनों का गान कराया जाता है॥
नहीं दिखाये मां बहिनों को कटे हुए उन स्तन को।
नहीं दिखाया घाटी के विस्थापित हिन्दू क्रंदन को॥
नहीं दिखाई जबरन सुन्नत और उखाड़ी चोटी को।
नहीं दिखाई मां के मुॅह में संतानों की बोटी को॥
आतंकी की धमकी ने टी. वी. से हिन्दी हटवा दी।
समाचार कहनेवाली के सिर से बिन्दी हटवा दी॥
छोड़े चार चार आतंकी मुफ्तखोर की मुफती ने।
मान बढाया आतंकी का बिरियानी की तृप्ति ने॥
पन्ना धायों के त्यागों पर आज रुबिया भारी है।
तीन सौ सित्तर के रुपों में ”चाचा” की गद्दारी है॥
सेना तो है वीर शिवा की पर शासन जयचन्दों का।
चाणक्यों की लाशों पर सिंहासन फिर से नन्दों का॥
बेटे ने ए के छप्पन ली, बाप ने बापू की लाठी।
दो मुंहवाली इस नीति ने खून से सनवा दी घाटी॥
छाये भय को रोष बनाना ही होगा।
सेनाओं का जोश बढ़ाना ही होगा।
पुंछे हुए सिन्दूरों को अंगार बनाना ही होगा।
आहों को गांडीवों की टंकार बनाना ही होगा॥
इस उपाय के बिना नहीं कोई भी और ठिकाना है।
वरना क्या कश्मीर हाथ से पूरा भारत जाना है॥
लाल चौक तक सेना की तोपें ले जाने आया हुँ॥
जागो जागो जागो जागो तुम्हें जगाने आया हुँ॥
ऑसू बेच के हम खरीद लाये नकली मुस्कानों को ।
बिना जड़ों के फूलों से सज्जितकर लिया मकानों को ॥
चौपालें वीरान हुईं मन की पीड़ा का जिक्र नहीं ।
कौन कहॉ जीता मरता है इसकी कोई फिक्र नहीं॥
जीवरहित पृथ्वी को करने की कर ली तैयारी है।
और मंगल पर जीव खोजती दृष्टि आज हमारी है॥
चर्खा तोड़ दिया बापू का झूठे खद्दर वालों ने।
सौदा कर डाला धरती का धरती के रखवालों ने॥
गौमाता बन गई फूड और गंगा रह गई पानी है।
भारत मॉं को डायन कहती मजहब की शैतानी है॥
पशु देश के काट काटकर मांस भिजाया जाता है।
उसके बदले गोबर का आयात कराया जाता है॥
सन्डे मन्डे खाओ अन्डे सरकारें खुद कहती है।
दूध हुआ गायब नदियॉं खून और दारु की बहती है॥
मर्यादा छटपटा रही फंसकर पश्चिम की बाँहों में।
तुलसी-कम्बन वाले लड़ते भाषा के चौराहों में॥
माइकेल जेक्सन रौंद रहे हैं कजरी-मटकी नाचों को।
स्टारों ने तोड़ दिया है संस्कृति के ढांचों को॥
थर्माकोली ग्लासों ने माटी के कुल्हड़ फोड़ दिये।
अनजाने ही पश्चिम से मन के नाते जोड़ दिये॥
करने को तो जा पहुँचे हम चंदा और सितारों तक।
पर उतने ही दूर हुए है ना पहुँचे हम परिवारों तक॥
शेक्सपियर के चक्कर में हम वाल्मीक को भूल गये।
संयम आचारों वाली सारी ही सीख को भूल गये।
दारु मुर्गे अण्डे खाकर ही जीना तो जीना है।
गंगा मैली कहकर पेप्सी कोकाकोला पीना है।
मैं भारत से ऐसी गंदी रीति मिटाने आया हुँ॥
सदाचार की गंगा का अवतरण कराने आया हुँ॥
जागो जागो जागो जागो तुम्हें जगाने आया हुँ॥
भारत को मॉं कहने से जिनकी छाती फट जाती है।
वन्दे मातरम्‌ में से जिनको मजहब की बू आती है॥
नारी की मर्यादा लूटी ऐसे ही गद्दारों ने।
महिलाओं के शील भंग करवाये खुद सरकारों ने॥
ख्वाजा के खादिम करते हैं ब्लेक मेल महिलाओं का।
ऐसे किस्से की ही खबरें आई है जलगावों का॥
मॉ बहिनों के वस्त्र उतारे चौराहों पर गुंडो ने।
उत्तर में इज्जत लूटी सेक्यूलर वादी पण्डों ने॥
चिल्लाये जो गला फाड़कर एक सती की घटना पर।
पूंछ दबाकर चुप क्यों बैठे, इस भारी दुर्घटना पर॥
सावित्री के पाठ कहीं ना आज पढ़ाये जाते हैं।
ऐश्वर्या के ऐश्वर्यों में राव तलक बह जाते हैं॥
उड़नपरी उषा भारत में कितने स्वर्ण पदक लाई।
गीता बहिन ने जान लड़ाकर कितनी गायें बचवाई॥
इनकी खबरें अखबारों और सरकारों के कोने में।
नाम है नंगाई दिखलाकर विश्व सुन्दरी होने में॥
दाउद के पैसों की माया भारी है।
बनी सेक्स सिंबाल देश की नारी है॥
सेक्सी-सेक्सी चोली चुनरी गाने हैं।
फिल्में बस नंगे पन की दुकानें है॥
सोचो थोड़ा ब्लेकमेल क्यों होता है ?
कौन भला इन विषवृक्षों बोता है ?
क्यों होते हैं ब्लेक मेल जलगावों में।
क्यों मर्यादा कुचली जाती पावों में॥
नारी पर ये आपत्ति क्यूं आई है।
जान सको तो जानों क्या सच्चाई है॥
रामायण का युग ना अभी भी बीता है।
लक्ष्मण रेखा जब उलांघती सीता है॥
निकले कदम नहीं वापस आ सकते है,
सीता की गलती से रावण जीता है।
जगविजयी रावण मर्यादा की रेखा से डरता है॥
मन रावण तन की सीता रेखा के बाहर हरता है।
रामायण ने बात यही बतलाई है ।
जान सको तो जानो ये सच्चाई है॥
प्रदर्शनी सुंदरता के नामों पर नग्न शरीरों की।
देह लक्ष्य बन जाती यूं जालिम नजरों के तीरों की॥
विश्वमंच से कालेजों तक प्रांत नगर तक घर घर तक,
खिंची हुई हैं सीमायें सुन्दरता की जागीरों की॥
हर इक विज्ञापन पूरा होता है नारी दर्शन से।
दाढ़ी की ब्लेडे बिकती है नारी देह प्रदर्शन से॥
यहॉं अंजली बडी़ शान से नग्न चित्र खिचवाती है।
और आधुनिकता में नीना बिन ब्याही मॉं बन जाती है॥
खुली तिजोरी लेकर के डाकू के घर पर जाना क्यों ?
और ऐसे में डाकू पर लुटने का दोष लगाना क्यों ?
विश्व सुंदरी क्या खाती क्या पीती कैसे सोती है।
अखबारों के प्रथम पृष्ठ पर खबरें ये ही होती है॥
ऑख देश की जिस नश्वर सुन्दरता पर है टिकी हुई।
पेप्सी कोकाकोला के हाथों में है वो बिकी हुई ॥
जिनका हर इक पल और हर इक अंग विदेशी हाथों में।
कैसे करें भरोसा उनकी देश भक्ति की बातों में।
सीने कूल्हे नपवाना भारत की सच्ची भक्ति है।
पंतप्रधानों तक की भी इस भक्ति में आसक्ति है।
नारी के श्रम की अब भी कम कीमत ऑकी जाती है।
समता की बातें बोलो क्यूँ वहॉ तलक न जाती है ?
मैं तो दोनों पक्षों की गलती दिखलाने आया हुँ॥
जागो जागो जागो जागो तुम्हें जगाने आया हुँ॥
हमें खुशी है नारी चादर दीवारी को पार करें।
सुन्दरता की मूरत बन जाये सोलह श्रृंगार करें॥
नारी बने गुलाम पुरुष की कहने या ये अर्थ नहीं।
कहने का मतलब अतीत की मर्यादायें व्यर्थ नहीं॥
गीत लक्ष्मीबाई के हम गाते हैं।
भारतियों के गुण को शीश झुकाते हैं॥
इन्दिरा-विजया पलकों पर बिठलाते हैं।
माता कहकर गीत धरा के गाते हैं॥
नारी को नर से भी उँचा माना है।
आदि शक्ति के रुपों में पहचाना है॥
कहते ग्रंथ जहॉं नारी की पूजा हो,
स्वर्ग वही देवों का वही ठिकाना है॥
आगम निगम पुराण सभी ने नारी महिमा गाई है।
जान सको तो जानो ये सच्चाई है॥
पर कपडों से मुक्ति जब नारी मुक्ति कहलाती है।
डीयर के संग बीयर पीने को होटल में जाती है।
इस मदहोशी में जो उनके चित्र उतारे जाते हैं,
उन चित्रों के द्वारा नारी ब्लेकमेल हो जाती है।
बुरा लगे या भला लगे, जो भी है उसको सोचो तुम,
मैं तो सच्चाई पर से पर्दा हटवाने आया हुँ॥
जागो जागो जागो जागो तुम्हें जगाने आया हुँ॥
सेक्यूलर के नामों से पनपी पाप प्रजाती है।
वन्दे मातरम में हो उनको मजहब की बू आती हैं॥
सरस्वती के वन्दन से भी वही लोग कतराये हैं।
संस्कृति से मैकाले के लाल पुनः घबराये हैं॥
संस्कार के लिये आज शिक्षा मे हैं स्थान नहीं।
पुरखों का नव पीढी़ को मिल पाया कोई ज्ञान नहीं॥
अपना धर्म सिखाओं मुस्लिम क्रिश्चन को आजादी है।
हिन्दू धरम सिखना ये अपराध पुरातन वादी है॥
पाप भरी शिक्षा पाकर हमने अपना सब खोया है।
संस्कार के फूल तोड़कर भोग का केक्ट्स बोया है॥
वे सब अपमानित जिनको हिन्दू ने माता बोला है।
गो माँ कटती लेकिन हमने अपना मुंह ना खोला है॥
आज प्रदूषित मैली होकर रोती माता गंगा है।
सरस्वती सीता को इक शैतान बनाता नंगा है॥
भारत माँ को डायन कहकर यहाँ पुकारा जाता है।
तुलसी को पाखंड बताकर के धिक्कारा जाता है॥
जो भी शिक्षित हुआ उसी ने माँ का आँचल खेंचा है।
पढे़ लिखों ने ही तो अपनी भारत माँ को बेचा है॥
सेक्यूलर शिक्षा ने हमको संस्कृति से दूर किया।
माँ बाप को छत से गिरकर मरने पर मजबूर किया॥
सरस्वती माँ का प्रसाद दानव दुष्टों का भोग बना।
शिक्षा थी औषधि आजकल नाइलाज ये रोग बना॥
प्रगतिशीलता की अंधी आँधी में जो हैं उजड़ गये,
भूले बिसरे उन गुरुकुल की याद दिलाने आया हुँ॥
जागो जागो जागो जागो तुम्हें जगाने आया हुँ॥