गांधी के बेटे ही गांधी के हत्यारे हैं॥ जागो जागो जागो तुम्हें जगाने आया हुँ॥ जीना है तो पापियों का खून पीना सीख॥ वन्दे मातरम् । फिर मत कहना कवियों ने

जीना है तो पापियों का खून पीना सीख॥
कल मौत आने को ही है तेरे भी द्वार।
क्या होगा बहाने से यूँ आँसुओं की धार ?
फैल रहा है जहाँ में ये जो पापाचार।
इसका है प्यारे सिर्फ एक उपचार॥
भाइयों से बड़ा भाई बन मेरे यार।
चाकुओं के आगे तू निकाल तलवार॥
बंदुकों के आगे प्यारे बम फोड़ दे।
जिन्दगी जो चाहे कायरता छोड़ दे॥
पापियों से प्राणों की तू माँग मत भीख।
जीना है तो पापियों का खून पीना सीख॥
राम ने न हाथ सूर्य के आगे पसारा था।
कृष्ण ने भी युद्ध में न राम को पुकारा था॥
जिसकी लड़ाई उसको ही लड़ना पड़ेगी,
पुरखों का नाम तो बना सिरफ सहारा था॥
उठा तीन चक्र मार पापियों को तू,
राम कृष्ण की भी थी यही तो तकनीक।
जीना है तो पापियों का खून पीना सीख॥
माना कि तू व्यर्थ रक्तपात के विरुद्ध है।
दिल में तेरे माँ महावीर और बुद्ध हैं॥
पर यही माता चंडिका का रूप धरती है,
पापियों से जब ठन जाता धर्मयुद्ध है॥
पापियों के मुंड गले धारती है माँ,
शांति पाने का माँ काली से करीना सीख।
जीना है तो पापियों का खून पीना सीख॥
औरों के लिया न बोलेगा वो मारा जायेगा।
कल घाट मौत के वो भी उतारा जायेगा॥
गर हम गैरों के सहारे नहीं बने तो,
कौन बनने को हमारा सहारा आयेगा?
आज तूने पड़ौसी की आह न सुनी,
तो कल कौन सुनेगा बता दे तेरी चीख।
जीना है तो पापियों का खून पीना सीख॥
जनता की फूट आतंक की जन्मदाता है।
एक आदमी लाखों करोड़ों को डराता है॥
एक-एक करके मारे जाते हैं लोग क्योंकि,
एक को बचाने न कोई दूजा आगे आता है॥
अपनी जो जिन्दगी बचाना चाहे तू तो,
थोड़ा-थोड़ा औरों के लिये भी जीना सीख।
जीना है तो पापियों का खून पीना सीख॥
बलि नहीं हाथी शेर की चढ़ाई जाती है।
पंचमी सदा नागों की ही मनाई जाती है॥
भेड़ के रोने से शेर संत नहीं बनते हैं,
कोरी अहिंसा में जिन्दगी गवाँई जाती है॥
हिंसा ने जो घाव किये देश पे तेरे,
ऐसे घावों को तू हिंसा से ही सीना सीख।
जीना है तो पापियों का खून पीना सीख॥
संत हमारे परशुराम जैसे होते हैं।
दानवों के रक्त से दानवी पाप धोते हैं॥
सिद्ध बुद्ध अंगुलीमालों को संत बनाते हैं,
पर ढोंगी डूबते औरों को भी डुबोते हैं॥
कृष्ण का बेटा है तो बजा दे पांचजन्य,
सीख आधी अधूरी तू गांधी की न सीख।
जीना है तो पापियों का खून पीना सीख॥
विषहीन सर्प बच्चों का खिलौना होता है।
माँझी शक्तिहीन हो तो नैया को डुबोता है।
जाग और सोये शौर्य स्वाभिमान को भी जगा,
जागता है वो पाता है सोता है वो खोता है।
जीवन जुड़ा है तेरा ओरों के ही साथ,
परिहत में बहाना तू पसीना सीख॥
जीना है तो पापियों का खून पीना सीख॥
भूल गये हम मातारानी के त्रिशूल।
उड़ाये कबूतर उगाये खूब फूल॥
इसलिए माता नंगी है हमारी आज,
और मकबूल खूब रहे फलफूल॥
दान हफ्ता देते हैं झुक के सभी
कमजोर को मिलती है घृणा से भीख॥
जीना है तो पापियों का खून पीना सीख॥