Vedas The Way of light   The Child   Hindhu concept of God  Hindhu Vivah   Hamare Vanvashi  Hindhu Art  Hindhu Teerth  Shri ram  Hindhu Science  Yoga 

वेद भारतीय संस्कृति के मूलाधार


वेदों को भारतीय संस्कृति का प्राण भी कहा जाये तो अतिशयोक्ति नहीं होगी. आदिकाल के तपोपूत मंत्रदृष्टा ऋषियों ने अपने शुद्धहृदय में परमात्मा प्रदत्त जिस ज्ञान कि अनुभूति की, उसे देववाणी कहकर समाज को अर्पित कर दिया. इस वाणी में भौतिक, अधिभौतिक एवं आध्यात्मिक हर तरह का ज्ञान समाहित है. आम तौर पर लोगों को वेद अवं उनके नाम तो पता होते हैं पर उनके बारे में अधिक जानकारियां नहीं होती. वैसे भी सामान्य संस्कृत का ही ज्ञान लोगों को नहीं है ऐसे में वेदों की भाषा और विषय वास्तु समझना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन सा लगता है. अनेक वैदिक शोध ग्रंथों का अध्ययन करने के बाद बनी इस चित्रमाला को देखकर ना सिर्फ वेदों, वेदांगों, सहायक ग्रंथों के बारे में पता चल जाता है वरन वेदों में उस समय के गणित, रासायनिक, वास्तु, खगोल, परिवहन आदि एवं सामाजिक रचना, राजनीति, विषयों की जानकारी भी मिल जाती है. यहाँ चित्र माला प्रथम बार १९९२ में प्रयाग माघ मेला, १९९८ में नई दिल्ली, १९९९ में त्रिनिदाद एंड टोबेगो के दीवाली नगर तथा २०११ में अयोध्या वेद सम्मलेन के अवसर पर प्रदर्शित की जा चुकी है.