बाबा सत्यनारायण मौर्य
June 8th, 2007‘बाबा’ ……… अनेक विधाओं को अपने अंदर समेटे हुऐ एक अद्भुत व्यक्त्वि…..जिसे एक-दो बार में जाना समझा नहीं जा सकता। सागर सी गहराइयों वाला जीवन जिसमें जितना गहरे उतरो, उतनी ही विविधता मिले…. पर्वत की तरह उन्नत चिंतन , जितना चढ़ो, उतना ही उंचा और भी दिखता रहे। संभव है ढूढ़ने पर ऐसा प्रतिभा सम्पन्न व्यक्ति दुनियॉ में मिल जाये…पर वह गॉव के सीधे साधे देहातियों से लेकर देश-विदेश के बुद्धि जीवियों तक, महानगरीय सभ्यता में पले बड़े फेशनेबल युवावर्ग से लेकर कस्बाई बुजुर्गो तक, मजदूरों से लेकर व्यापारियों तक, साधु-संतों के आश्रमों से लेकर पश्चिमी रंग में रंगी फिल्मी नगरी तक,…. सभी को समान रूप से अपना सा लगता हो, एसा मुश्किल है। आधुनिकतम उपकरणों से युक्त पर दिखावे की प्रवृत्ति से मुक्त बाबा को अंदर से जानना तो दूर की बात है, अचानक मिल जाये तो बाहर से पहचानना भी कम मुश्किल नहीं। कई बार नाम सुनकर मिलने के लिये आये लोग बाबा से ही पूछ लेते हैं कि ” बाबाजी कहॉं मिलेंगे ? ”मंचों पर अधिकतर जिन्होंने पहली बार बाबा को देखा आश्चर्य से सोचते है कि ये भी कवि हे ! पर जब सुनते हैं तो रूकना नहीं चाहते। देश-विदेश में श्रोताओं द्वारा सर्वाधिक सराहे और दिल से चाहे जाने वाले ‘कवि बाबा’ को सुनकर ऐसा कभी नहीं लगता कि किसी और को सुना जा रहा है…..लगता है अन्दर के किसी कोने से स्वयं की आत्मा की आवाज बाहर निकलकर स्वयं के कानों तक पहुचकर सारे शरीर को झकझोर रही है। काव्य के विविध रसों से जनमानस में उत्पन्न हॅसी, ऑसू, आक्रोश और मन का उद्वेलन सब मिलकर श्रोताओं को उनकी भारतीयता पर सोचने को मजबूर करता है। केवल कविता ही नहीं, च्रित्रकला, व्यंग्य चित्रकारी, लेखन, गायन, और दर्शन-प्रवचन आदि हर विधा के माध्यम से भारतीयता और हिन्दुत्व की गौरव गरिमा जगाने का लक्ष्य लेकर यायावर फकीर की तरह भटकने वाले बाबा बच्चे, किशोर, युवा और बुजु्र्गो तक सबके अपने बाबा हैं। एक चित्रकार के रूप में विभिन्न विषयों पर बाबा की तूलिका चली है। भारतीय संस्कृति के गूढ़ दार्शनिक विषयों, ऐतिहासिक संदर्भों, पौराणिक कथानकों, परम्पराओं आदि से लेकर प्राचीन विज्ञान तक तो राम जन्मभूमि, गौरक्षा स्वदेशी जैसे ज्वलंत विषयों से लेकर राजनैतिक मुद्दों तक बाबा के रचनात्मक हाथ सक्रिय रहे हैं। देश-विदेशों में ये विषय जब चित्र और कार्टून्स के रूप में आये तो एक आंदोलन बन गये। बाबा बहुमुखी कलाकार तो हैं ही, एक अच्छे मीडिया प्रबंधक भी रहे हैं। टी वी की दुनियॉ में धार्मिक प्रवचनों का प्रचलन जो अनेक धार्मिक चैनल्स की पृष्ठभूमि बना है, बाबा की देन है। बाबा की कला प्रस्तुति देखकर कोई तटस्थ नहीं रह सकता, उसे प्रतिक्रिया व्यक्त करना ही पड़ती है….यातो समर्थन करेगा या घोर विरोध। क्योंकि बाबा की कला सिर्फ कला नहीं….एक अभियान है।


